प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना 2026: नीतिगत पुनर्गठन, संस्थागत रूपरेखा एवं परिचालन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा संचालित एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। प्रारंभिक रूप से जून 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शहरी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के सबसे सुभेद्य घटक—रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स)—को कार्यशील पूंजी सहायता प्रदान करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई थी। समय के साथ इस योजना ने केवल आपातकालीन राहत तंत्र से आगे बढ़कर एक स्थायी सूक्ष्म-ऋण और वित्तीय समावेशन मंच का रूप ले लिया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित पुनर्गठित ढांचे के अंतर्गत इस योजना की ऋण वितरण अवधि को 31 मार्च 2030 तक विस्तारित किया गया है। यह पुनर्गठन आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के संयुक्त समन्वय से लागू किया जा रहा है। कुल ₹7,332 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ इस योजना का लक्ष्य 50 लाख नए वेंडर्स सहित कुल 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स को संस्थागत ऋण, डिजिटल वित्तीय प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में समाहित करना है।
पुनर्गठित ऋण संरचना और वित्तीय सीमाएं
पुनर्गठित पीएम स्वनिधि योजना का मूल आधार क्रमिक ऋण प्रणाली (Graduated Credit Model) है। इस व्यवस्था के अंतर्गत छोटे स्तर से ऋण की शुरुआत की जाती है और समयबद्ध पुनर्भुगतान के आधार पर लाभार्थी को स्वतः उच्च ऋण सीमा के लिए योग्य माना जाता है। बाजार की महंगाई और बढ़ती कार्यशील लागत को संतुलित करने के लिए प्राथमिक और द्वितीय चरणों की ऋण सीमाओं में बढ़ोतरी की गई है।
योजना के सभी चरणों में ऋण पूरी तरह संपार्श्विक-मुक्त (Collateral-Free) होते हैं। सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) बैंकों और वित्तीय संस्थानों को पोर्टफोलियो आधार पर क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान करता है, जिससे बैंकों के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का जोखिम न्यूनतम हो जाता है और वे स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी जमानत या गारंटर के ऋण स्वीकृत करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
ऋण चरणों एवं वित्तीय शर्तों का तुलनात्मक विवरण
| ऋण का चरण | अधिकतम ऋण सीमा | पुनर्भुगतान अवधि | पात्रता एवं संवितरण मानदंड | क्रेडिट गारंटी सुरक्षा (CGTMSE) |
| प्रथम चरण (First Tranche) |
₹15,000 तक (पूर्व में ₹10,000) [cite: 4, 9, 13] |
12 महीने (मासिक किस्तें) |
वैध वेंडिंग प्रमाण पत्र (CoV), पहचान पत्र या अनुमोदित सिफारिश पत्र (LoR) |
31.87% पोर्टफोलियो आधार पर |
| द्वितीय चरण (Second Tranche) |
₹25,000 तक (पूर्व में ₹20,000) [cite: 4, 9, 13] |
18 महीने (मासिक किस्तें) |
प्रथम चरण के ऋण का समयबद्ध अथवा समय से पूर्व पूर्ण पुनर्भुगतान |
8.25% पोर्टफोलियो आधार पर |
| तृतीय चरण (Third Tranche) |
₹50,000 तक (अपरिवर्तित) [cite: 4, 9, 13] |
36 महीने (मासिक किस्तें) |
द्वितीय चरण के ऋण का समयबद्ध अथवा समय से पूर्व पूर्ण पुनर्भुगतान |
6.00% पोर्टफोलियो आधार पर |
ऋण का पुनर्भुगतान समान मासिक किस्तों (EMI) के माध्यम से किया जाता है। यदि कोई लाभार्थी निर्धारित परिपक्वता अवधि से पहले ऋण का पूर्ण निपटान करता है, तो ऋणदाता संस्थान किसी भी प्रकार का पूर्व-भुगतान शुल्क (Pre-payment Penalty) नहीं लगा सकते। इसके अतिरिक्त, समय से पूर्व भुगतान करने पर अगले चरण के उच्च ऋण के लिए पात्रता तुरंत प्रभावी हो जाती है।
यूपीआई-संबद्ध रूपे क्रेडिट कार्डपुनर्गठित योजना का एक महत्वपूर्ण घटक द्वितीय चरण का ऋण सफलतापूर्वक चुकाने वाले लाभार्थियों के लिए यूपीआई-संबद्ध रूपे क्रेडिट कार्ड (UPI-linked RuPay Credit Card) की व्यवस्था है। इस पहल के तहत पात्र वेंडर्स को ₹30,000 तक की स्वीकृत क्रेडिट सीमा प्रदान की जाती है। यह व्यवस्था दैनिक व्यापारिक नकदी चक्र में आने वाले व्यवधानों को समाप्त करने और आकस्मिक व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक रिवाल्विंग क्रेडिट लाइन के रूप में कार्य करती है। इस क्रेडिट कार्ड घटक के लिए सीजीटीएमएसई द्वारा दावों का निपटान 31 मार्च 2035 तक समर्थित किया गया है।
वित्तीय प्रोत्साहन: ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक संरचना
पीएम स्वनिधि की संरचना केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय पर भुगतान और डिजिटल लेनदेन को सीधे मौद्रिक लाभ से जोड़ती है।
7% वार्षिक ब्याज सब्सिडी तंत्र
योजना के अंतर्गत ऋण खातों को मानक (Standard Asset) बनाए रखने और किस्तों का समय पर भुगतान करने पर 7% प्रति वर्ष की दर से ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है। ऋणदाता बैंकों द्वारा लागू ब्याज दर और इस 7% सब्सिडी के अंतर का समायोजन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से तिमाही आधार पर सीधे वेंडर के बैंक खाते में किया जाता है। 31 मार्च 2030 तक वितरित सभी ऋण इस सब्सिडी के पात्र हैं और संबंधित दावों का निपटान 31 मार्च 2033 तक जारी रहेगा।
डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन
रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए योजना में दोहरे कैशबैक का प्रावधान किया गया है, जिसके माध्यम से एक वेंडर प्रति वर्ष कुल ₹1,600 तक का प्रत्यक्ष नकद लाभ अर्जित कर सकता है।
वित्तीय प्रोत्साहनों की संरचना
| प्रोत्साहन श्रेणी | अधिकतम वार्षिक लाभ | पात्रता एवं गणना मानदंड | भुगतान की आवृत्ति |
| ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy) |
7% प्रति वर्ष |
नियमित या समय से पूर्व ईएमआई जमा करने पर |
त्रैमासिक (प्रत्यक्ष डीबीटी बैंक खाते में) |
| रिटेल बिक्री कैशबैक (Retail Cashback) |
₹1,200 प्रति वर्ष |
क्यूआर/यूपीआई से बिक्री स्वीकार करने पर अधिकतम ₹100 प्रति माह |
मासिक |
| होलसेल खरीद कैशबैक (Wholesale Cashback) |
₹400 प्रति वर्ष |
₹2,000 या अधिक की थोक डिजिटल खरीद पर ₹20 प्रति लेनदेन (अधिकतम 5 लेनदेन/तिमाही) |
त्रैमासिक (अधिकतम ₹100 प्रति तिमाही) |
यह डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन प्रणाली सीधे विक्रेता के लेनदेन इतिहास को डिजिटल रूप में प्रमाणित करती है, जिससे औपचारिक वित्तीय क्षेत्र में उनकी साख स्थापित होती है।
पात्रता मानदंड और लाभार्थी वर्गीकरण
पुनर्गठित योजना का भौगोलिक विस्तार केवल सांविधिक नगरों (Statutory Towns) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे क्रमिक रूप से जनगणना कस्बों (Census Towns) और शहरों से सटे अर्ध-शहरी (Peri-Urban) क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया है। इस नीतिगत विस्तार से शहरी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े ग्रामीण व उप-शहरी विक्रेताओं को भी वैधानिक पहचान और वित्तीय सहायता मिल सकी है।
लाभार्थी श्रेणियां
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श्रेणी A (सर्वेक्षित एवं प्रमाणित वेंडर): ऐसे स्ट्रीट वेंडर्स जिनके पास शहरी स्थानीय निकाय (ULB) या टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) द्वारा जारी वेंडिंग प्रमाण पत्र (Certificate of Vending – CoV) अथवा पहचान पत्र उपलब्ध है।
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श्रेणी B (सर्वेक्षित किंतु अप्रमाणित वेंडर): ऐसे वेंडर जिनकी पहचान नगर निकाय के वेंडिंग सर्वेक्षण में दर्ज की गई है, किंतु उन्हें पहचान पत्र या CoV जारी नहीं हुआ है।
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श्रेणी C (सर्वेक्षण उपरांत नए अथवा छूटे हुए वेंडर): ऐसे विक्रेता जो नगर निकाय के सर्वेक्षण में शामिल नहीं हो सके थे अथवा जिन्होंने सर्वेक्षण पूरा होने के बाद वेंडिंग गतिविधि प्रारंभ की है, और जिनके पास यूएलबी/टीवीसी द्वारा जारी सिफारिश पत्र (LoR) है।
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श्रेणी D (अर्ध-शहरी एवं जनगणना कस्बों के वेंडर): ऐसे विक्रेता जो जनगणना कस्बों या आसपास के उप-शहरी क्षेत्रों में व्यवसाय करते हैं और जिनके पास ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) अथवा संबंधित स्थानीय निकाय द्वारा अनुमोदित सिफारिश पत्र (LoR) उपलब्ध है।
सामान्य पात्रता शर्तें
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आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए; योजना में कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है।
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क्रेडिट स्कोर: इस योजना के तहत पारंपरिक सिबिल या क्रेडिट स्कोर की अनिवार्यता लागू नहीं होती। ऋण आवेदन केवल तभी निरस्त किया जा सकता है जब आवेदक का पूर्व का कोई ऋण खाता एनपीए (NPA) या ‘रिटन-ऑफ’ (बट्टे खाते में) दर्ज हो।
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व्यवसाय की प्रकृति: दैनिक उपयोग की वस्तुएं, फल-सब्जी, स्ट्रीट फूड, परिधान, पुस्तकें बेचने वाले वेंडर्स के साथ-साथ नाई, मोची, धोबी जैसी सेवाएं देने वाले कारीगर भी इसके दायरे में आते हैं। उद्यम पंजीकरण (Udyam) या किसी औपचारिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती।
अनिवार्य दस्तावेजों की रूपरेखा
प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए योजना के प्रलेखन ढांचे को पूरी तरह डिजिटल और न्यूनतम रखा गया है।
आवश्यक प्रलेखन विवरण
| दस्तावेज श्रेणी | मान्य दस्तावेज | प्रशासनिक प्रयोजन एवं दिशा-निर्देश |
| पहचान एवं पता प्रमाण |
आधार कार्ड |
आधार कार्ड का मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य है ताकि डिजिटल e-KYC पूरा हो सके। असम और मेघालय के आवेदकों के लिए मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) मान्य है। |
| वेंडिंग प्राधिकार प्रमाण |
वेंडिंग सर्टिफिकेट (CoV), यूएलबी आईडी कार्ड, अथवा डिजिटल LoR |
सांविधिक शहरों में TVC/ULB द्वारा तथा जनगणना कस्बों में BDO द्वारा स्वीकृत। हस्तलिखित या कागजी LoR मान्य नहीं हैं; केवल पोर्टल जनरेटेड डिजिटल LoR ही स्वीकार्य हैं। |
| बैंक खाता प्रमाण |
सक्रिय बचत बैंक खाता पासबुक या विवरण (Bank Statement) |
खाता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और आधार सीडिंग के लिए सक्षम होना चाहिए ताकि ब्याज सब्सिडी का अंतरण हो सके। |
| डिजिटल भुगतान पहचान |
बैंक खाते से लिंक वैध एवं विशिष्ट UPI ID |
डिजिटल ऑनबोर्डिंग, क्यूआर कोड लिंकिंग और मासिक/त्रैमासिक कैशबैक संवितरण हेतु अनिवार्य। |
| संवितरण उपरांत दस्तावेज |
प्रथम/द्वितीय ऋण का खाता बंदी प्रमाण (Loan Closure Document) |
द्वितीय चरण के लिए प्रथम ऋण का और तृतीय चरण के लिए द्वितीय ऋण का नो-ड्यूज रिकॉर्ड। तृतीय चरण के लिए स्टॉक/फंड उपयोग का केवल एक स्व-घोषणा पत्र आवश्यक है, खरीद रसीदों की कोई बाध्यता नहीं है। |
चरणबद्ध आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया
पीएम स्वनिधि के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। वेंडर आधिकारिक वेब पोर्टल (pmsvanidhi.mohua.gov.in), पीएम स्वनिधि मोबाइल ऐप अथवा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
सिफारिश पत्र (LoR) निर्गमन प्रक्रिया
जिन विक्रेताओं के पास पूर्व से वेंडिंग प्रमाण पत्र या आईडी कार्ड नहीं है (श्रेणी C और D), उन्हें ऋण आवेदन से पहले डिजिटल सिफारिश पत्र प्राप्त करना होता है:
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पोर्टल पर पंजीकरण: आवेदक आधिकारिक पोर्टल पर ‘Apply for LoR’ विकल्प चुनकर आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर और ओटीपी के माध्यम से सत्यापन करता है।
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विवरण प्रविष्टि: वेंडिंग का स्थान, सामग्री/सेवा का प्रकार और स्थानीय प्रमाण प्रस्तुत किए जाते हैं।
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सत्यापन एवं निर्गमन: शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय/टीवीसी द्वारा तथा जनगणना कस्बों/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ब्लॉक स्तरीय सत्यापन समिति की रिपोर्ट के आधार पर ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) द्वारा 15 दिनों के भीतर डिजिटल LoR जारी किया जाता है।
ऋण आवेदन की चरणबद्ध ऑनलाइन कार्यप्रणाली
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पोर्टल लॉगिन एवं e-KYC: पीएम स्वनिधि पोर्टल अथवा ऐप पर पंजीकृत मोबाइल नंबर से ओटीपी आधारित लॉगिन किया जाता है। इसके उपरांत आधार नंबर दर्ज कर यूआईडीएआई (UIDAI) के माध्यम से बायोमेट्रिक या ओटीपी आधारित e-KYC पूर्ण किया जाता है।
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श्रेणी एवं वेंडिंग विवरण: आवेदक अपनी उपयुक्त श्रेणी (A, B, C, या D) का चयन करता है और सर्वेक्षण संदर्भ संख्या (SRN) अथवा LoR आवेदन संख्या प्रविष्ट करता है।
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व्यक्तिगत एवं बैंक विवरण: व्यक्तिगत विवरण, पारिवारिक निर्भरता, वर्तमान पता और बैंक खाते का आईएफएससी (IFSC) कोड सहित ब्योरा दर्ज किया जाता है।
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ऋणदाता संस्थान (Lender) का चयन: आवेदक अपनी सुविधानुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, सहकारी बैंक अथवा एनबीएफसी-एमएफआई का चयन करता है।
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आवेदन सबमिशन: यूपीआई आईडी और आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न कर आवेदन डिजिटल रूप से जमा किया जाता है।
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स्वीकृति एवं संवितरण: चयनित बैंक शाखा द्वारा पोर्टल पर प्राप्त आवेदन का ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है और डिमांड प्रॉमिसरी नोट (DPN) निष्पादित होने के पश्चात ऋण राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में संवितरित कर दी जाती है।
सहायता प्राप्त (Assisted) आवेदन माध्यम
डिजिटल माध्यमों से अनभिज्ञ विक्रेता अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), बैंक सखी, बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट्स (BC), अथवा नगर निगम/नगर पालिका के स्वनिधि हेल्पडेस्क पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर सहायता और शिकायतों के निवारण हेतु राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 11 1979 कार्यरत है।
‘स्वनिधि से समृद्धि’ एवं समग्र सामाजिक-आर्थिक लाभ
पीएम स्वनिधि केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के समग्र उत्थान और उन्हें औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र से जोड़ने की एक एकीकृत नीति है।
‘स्वनिधि से समृद्धि’ (SVANidhi se Samriddhi)
इस घटक के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने वाले विक्रेताओं और उनके परिजनों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग (Socio-Economic Profiling) की जाती है। इस प्रोफाइलिंग के आधार पर वेंडर परिवारों की पात्रता निर्धारित कर उन्हें केंद्र सरकार की 8 प्रमुख सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ा जाता है:
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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): आकस्मिक मृत्यु पर ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर।
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प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): दुर्घटना मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर।
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प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM): 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3,000 मासिक पेंशन की वृद्धावस्था सुरक्षा।
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प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): शून्य शेष बैंक खाता, रूपे डेबिट कार्ड और ओवरड्राफ्ट सुविधा।
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वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC): देश के किसी भी हिस्से में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन पोर्टेबिलिटी।
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जननी सुरक्षा योजना (JSY): संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने हेतु प्रत्यक्ष नकद सहायता।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): प्रथम जीवित बच्चे के जन्म पर मातृत्व लाभ सहायता।
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भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (BoCW) कल्याण: निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र कल्याण बोर्डों के अंतर्गत प्रदत्त सामाजिक लाभ
क्षमता निर्माण एवं खाद्य सुरक्षा
स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के साथ साझेदारी में विशेष स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को डिजिटल वित्तीय साक्षरता, यूपीआई सुरक्षा और सूक्ष्म-उद्यम प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।
औपचारिक वित्तीय इतिहास एवं आर्थिक उन्नयन
इस योजना का सबसे दूरगामी प्रभाव स्ट्रीट वेंडर्स का औपचारिक क्रेडिट स्कोर निर्माण है। अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर रहने वाला यह वर्ग जब समय पर बैंक ऋण चुकाता है, तो उसका एक क्रेडिट इतिहास तैयार होता है। यह स्थापित क्रेडिट प्रोफाइल भविष्य में वेंडर्स को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) जैसी बड़ी वित्तीय योजनाओं से उच्च ऋण प्राप्त करने और सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
निष्कर्ष
पीएम स्वनिधि योजना का 2030 तक का पुनर्गठित विस्तार भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा तंत्र में समाहित करने का एक प्रभावी नीतिगत मॉडल प्रस्तुत करता है। प्रथम और द्वितीय चरण के ऋणों में वृद्धि (क्रमशः ₹15,000 और ₹25,000), ₹30,000 तक की सीमा वाले रूपे क्रेडिट कार्ड का प्रावधान, ₹1,600 तक का वार्षिक डिजिटल कैशबैक और जनगणना कस्बों तक का क्षेत्रीय विस्तार जमीनी स्तर पर कार्यशील पूंजी की उपलब्धता को मजबूत करता है। संपार्श्विक-मुक्त ऋण, 7% की ब्याज सब्सिडी और ‘स्वनिधि से समृद्धि’ के माध्यम से बहुआयामी कल्याणकारी योजनाओं का जुड़ाव स्ट्रीट वेंडर्स को वित्तीय आत्मनिर्भरता प्रदान कर दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
